NCRT Class 7 History अध्याय 2

NCRT Class 7 History अध्याय 2

इस आर्टिकल में हम NCRT Class 7 History के कक्षा 7 इतिहास – अध्याय 2: नया राजा और राज्य के बारे में जाएंगे दोस्तों महत्वपूर्ण बातों के साथ साथ कुछ सवालों के साथ साथ उत्तर भी दिए जायेगे तो चलिए शुरू करते है।

हजारों साल पहले जब मनुष्य ने खेती और बसावट शुरू की, तब समाज में कई परिवर्तन हुए। समय के साथ नए-नए राज्य और राजाओं का उदय हुआ।
इसी विषय पर यह अध्याय — “नया राजा और राज्य” — हमें बताता है कि
भारत में 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच किस प्रकार नए राजाओं ने शासन स्थापित किया और राज्य बनाए।

Table of Contents

🔹 1. नए राजाओं का उदय

7वीं शताब्दी के बाद भारत में कई छोटे-छोटे राज्य बनने लगे।
इनमें से कुछ राजा स्थानीय प्रमुखों (chiefs) से आगे बढ़कर बड़े शासक बने।
वे अपने-अपने क्षेत्रों पर अधिकार जमाने लगे और धीरे-धीरे राजा या सम्राट कहलाए।

राजा बनने के मुख्य कारण थे –

  • भूमि और संसाधनों पर नियंत्रण
  • सेना का निर्माण
  • कर वसूलने की शक्ति
  • धार्मिक प्रतिष्ठा

इन राजाओं को अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए लगातार युद्ध और संघर्ष करने पड़ते थे।


🔹 2. कर प्रणाली (Tax System)

राज्य चलाने के लिए राजाओं को धन की आवश्यकता थी, इसलिए उन्होंने लोगों से कर वसूलना शुरू किया।
कर के कुछ प्रमुख रूप थे –

कर का नामकिससे लिया जाता थाउद्देश्य
भूमिकर (Land tax)किसानों सेफसल या भूमि पर कर
बलि (Tribute)छोटे राजा या प्रमुख सेबड़े राजा को सम्मानस्वरूप भेंट
शुल्क (Custom duty)व्यापारियों सेव्यापार पर कर
कर (Tax)सामान्य जनता सेराज्य के खर्चों के लिए

कर से प्राप्त धन का उपयोग —

  • सेना रखने,
  • मंदिर और किलों के निर्माण,
  • और प्रशासन चलाने में किया जाता था।

🔹 3. प्रशासन की व्यवस्था

NCRT Class 7 History अध्याय 2

राजा अकेले शासन नहीं चला सकता था।
वह अधिकारियों की मदद से राज्य का प्रशासन चलाता था।

  • महासांधिविग्रहक – युद्ध और सेना का प्रमुख अधिकारी
  • अमात्य या मंत्री – प्रशासनिक कार्यों में राजा का सहयोगी
  • समंत – स्थानीय शासक जो राजा को सैन्य और आर्थिक सहयोग देते थे
  • राजपुरोहित – धार्मिक कार्यों और यज्ञों का आयोजन करने वाला

समंत धीरे-धीरे स्वतंत्रता की ओर बढ़ने लगे, और कई बार उन्होंने स्वयं को राजा घोषित कर दिया।


🔹 4. प्रमुख राजवंश और राज्य

इस समय भारत में कई शक्तिशाली राजवंश उभरे –

  1. गुर्जर-प्रतिहार – राजस्थान और गुजरात के आसपास का क्षेत्र।
  2. पाल वंश – बंगाल और बिहार के शासक।
  3. राष्ट्रकूट वंश – दक्षिण भारत में, उनकी राजधानी मन्ह्यखेट (कर्नाटक) में थी।
  4. चोल वंश – तमिलनाडु क्षेत्र में, दक्षिण भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य।

इन राजाओं ने अपने शासन का विस्तार करने के लिए युद्ध किए और धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यों में योगदान दिया।


🔹 5. युद्ध और विजयों का महत्व

राजा अपनी शक्ति दिखाने के लिए युद्ध करते थे।
जो राजा अधिक भूमि और धन जीतता था, उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती थी।
इन युद्धों के कारण –

  • राज्य सीमाएँ बदलती रहती थीं,
  • और नए प्रशासनिक क्षेत्र बनते थे।

🔹 6. मंदिर – सत्ता और संस्कृति का प्रतीक

मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं थे, बल्कि राज्य की समृद्धि और शक्ति के प्रतीक थे।

  • राजाओं ने भव्य मंदिर बनवाए जैसे –
    • राजराजेश्वर मंदिर (थंजावुर) – चोल राजा राजराज प्रथम ने बनवाया।
    • कैलाशनाथ मंदिर (कांचीपुरम)
  • मंदिरों में मूर्तियाँ, शिल्प और वास्तुकला उस समय की कला और संस्कृति को दर्शाती हैं।

मंदिरों को धन, भूमि और अनाज की दान दी जाती थी, जिससे वहाँ धार्मिक कार्य और शिक्षा चलती थी।


🔹 7. चोल साम्राज्य – एक उदाहरण

चोल साम्राज्य (9वीं से 13वीं शताब्दी) इस काल का सबसे शक्तिशाली राज्य था।

  • इसकी राजधानी थंजावुर थी।
  • राजा राजराज प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम ने इसे दक्षिण से लेकर श्रीलंका और बंगाल तक फैलाया।
  • चोलों ने एक सशक्त प्रशासनिक प्रणाली स्थापित की —
    • गाँवों में सभा (सभा या ऊर) के माध्यम से शासन होता था।
    • किसान, व्यापारी और अधिकारी मिलकर स्थानीय कार्य देखते थे।
  • चोलों के शासन में कला, वास्तुकला और व्यापार खूब फले-फूले।

नया राजा और राज्य” अध्याय हमें बताता है कि कैसे
7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच भारत में नए राजवंशों का उदय,
राजनीतिक संगठन, और संस्कृतिक उन्नति हुई।
यह काल भारत के इतिहास में एक स्वर्णिम युग माना जाता है —
जब शक्ति, कला, धर्म और संस्कृति का सुंदर संगम हुआ।

🧭 प्रश्नोत्तर (Question Answer in Hindi)


प्रश्न 1. सातवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच भारत में क्या परिवर्तन हुए?

उत्तर:
सातवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच भारत में कई छोटे-छोटे राज्यों का निर्माण हुआ।
नए-नए राजवंश जैसे गुर्जर-प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट और चोल उभरे।
राजाओं ने अपने राज्य का विस्तार किया और प्रशासन को संगठित बनाया।


प्रश्न 2. “समंत” कौन थे?

उत्तर:
समंत वे स्थानीय शासक थे जो किसी बड़े राजा के अधीन रहते थे।
वे राजा को सैनिक, धन और सहायता प्रदान करते थे।
समय के साथ कई समंत शक्तिशाली बन गए और स्वयं स्वतंत्र राजा घोषित हो गए।


प्रश्न 3. राजा कर क्यों वसूलते थे?

उत्तर:
राजा राज्य का संचालन करने के लिए कर वसूलते थे।
इन करों से वे –

  • सेना का खर्च,
  • प्रशासनिक काम,
  • मंदिरों और किलों का निर्माण,
  • तथा अन्य लोकहित कार्यों के लिए धन जुटाते थे।

प्रश्न 4. प्रमुख करों के नाम बताइए।

उत्तर:
प्रमुख कर इस प्रकार थे –

  1. भूमिकर – खेती या भूमि पर लगाया गया कर।
  2. बलि – छोटे राजा या प्रमुखों द्वारा बड़े राजा को दी जाने वाली भेंट।
  3. शुल्क – व्यापारियों से लिया जाने वाला कर।
  4. कर – सामान्य जनता से वसूला गया टैक्स।

प्रश्न 5. राष्ट्रकूट कौन थे और उन्होंने अपनी सत्ता कैसे बढ़ाई?

उत्तर:
राष्ट्रकूट वंश दक्षिण भारत का एक प्रसिद्ध राजवंश था।
उनकी राजधानी मन्ह्यखेट (कर्नाटक) थी।
राष्ट्रकूट राजा ध्रुव, गोविंद तृतीय और कृष्ण प्रथम ने कई युद्धों के माध्यम से अपने राज्य का विस्तार किया।
कृष्ण प्रथम ने एलोरा का कैलाशनाथ मंदिर बनवाया जो उनकी कला और शक्ति का प्रतीक है।


प्रश्न 6. चोल साम्राज्य की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:
चोल साम्राज्य दक्षिण भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य था।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ –

  • राजराज प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम सबसे प्रसिद्ध राजा थे।
  • राजधानी थंजावुर थी।
  • उन्होंने राजराजेश्वर मंदिर बनवाया।
  • चोल शासन में कृषि, व्यापार, नौसेना और कला खूब विकसित हुए।
  • स्थानीय स्तर पर ग्राम सभाएँ (सभा या ऊर) प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं।

प्रश्न 7. मंदिरों का क्या महत्व था?

उत्तर:
मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं थे, बल्कि राज्य की समृद्धि, शक्ति और संस्कृति के प्रतीक थे।

  • राजाओं ने मंदिरों को भूमि और धन का दान दिया।
  • मंदिरों में शिक्षा, संगीत और कला का भी विकास होता था।
  • वहाँ धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।

प्रश्न 8. राजाओं ने युद्ध क्यों किए?

उत्तर:
राजा अपनी शक्ति बढ़ाने और अधिक भूमि प्राप्त करने के लिए युद्ध करते थे।
युद्ध के माध्यम से –

  • राज्य की सीमाएँ बढ़ती थीं,
  • अधिक कर और संपत्ति मिलती थी,
  • और राजा की प्रतिष्ठा बढ़ती थी।

प्रश्न 9. चोल प्रशासन की विशेषताएँ क्या थीं?

उत्तर:

  • चोल साम्राज्य में प्रशासन बहुत संगठित था।
  • राज्य को जिलों, गाँवों और ग्रामसभाओं में बाँटा गया था।
  • प्रत्येक गाँव में सभा होती थी जो स्थानीय प्रशासन चलाती थी।
  • कर वसूलना, सड़क और तालाब बनवाना, तथा न्याय देना ग्राम सभा की जिम्मेदारी थी।

प्रश्न 10. “नया राजा और राज्य” अध्याय से हमें क्या सीख मिलती है?

उत्तर:
इस अध्याय से हमें पता चलता है कि कैसे भारत में नए राजवंशों और राज्यों का उदय हुआ।
राजाओं ने शासन, प्रशासन, युद्ध, कर व्यवस्था और सांस्कृतिक विकास के माध्यम से
भारत के इतिहास को नई दिशा दी।
यह काल भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक उन्नति का प्रतीक था

उम्मीद करता हु Class 7 History NCRT अध्याय से संबंधित सभी सवालों के जवाब मिल चुके होंगे और यही कोई प्रश्न है तो मुझे कॉमेंट कर पूछ सकते है। अध्याय-3 में जल्दी ही मिलेगी अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट learn result पर जाएं
धन्यवाद

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