🏭 NCERT Class 8 History Chapter 7 – उद्योग और अर्थव्यवस्था में बदलाव | Class 8 History Notes in Hindi
इस अध्याय में हम जानेंगे कि ब्रिटिश शासन (British Rule) के दौरान भारत के उद्योग, व्यापार और अर्थव्यवस्था में किस प्रकार के बदलाव हुए।
यह अध्याय “Weavers, Iron Smelters and Factory Owners” भारत की पारंपरिक बुनाई, लोहा उद्योग और फैक्ट्री प्रणाली के विकास और पतन की कहानी बताता है।
यहाँ हम जानेंगे —
- कैसे भारत के बुनकरों (weavers) ने दुनिया में नाम कमाया,
- कैसे ब्रिटिश नीतियों ने भारतीय उद्योगों को नुकसान पहुँचाया,
- और कैसे धीरे-धीरे भारत की अर्थव्यवस्था एक औपनिवेशिक (colonial economy) बन गई।
🧵 भारतीय वस्त्र उद्योग की शान (The Glory of Indian Textile Industry)
- भारत प्राचीन समय से ही कपड़ा उद्योग का केंद्र रहा है।
- भारतीय सूती, रेशमी और जरीदार कपड़े (जैसे ढाका मुसलिन, बनारसी साड़ी, कलमकारी) पूरी दुनिया में प्रसिद्ध थे।
- यूरोपीय व्यापारी भारत से कपड़ा खरीदने के लिए आते थे।
लेकिन जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर शासन स्थापित किया, तो उन्होंने भारतीय वस्त्र उद्योग को धीरे-धीरे कमजोर कर दिया।
⚙️ औद्योगिक क्रांति और भारत पर प्रभाव (Impact of Industrial Revolution on India)
- ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) के बाद मशीनों से कपड़ा बनने लगा।
- अंग्रेजी मिलों में बना सस्ता कपड़ा भारत लाया गया।
- भारतीय बुनकरों के लिए बाजार खत्म हो गया, और उनकी रोज़ी-रोटी छिन गई।
- ब्रिटिश सरकार ने भारत से कच्चा माल (cotton, indigo, iron) लिया और तैयार माल भारत में बेचा।
इससे भारत की अर्थव्यवस्था एक उपनिवेश (colony) में बदल गई — जहाँ उद्योग नष्ट हुए और अंग्रेजों का व्यापार बढ़ा।

🧑🏭 लोहा उद्योग और उसके कारीगर (Iron Industry and Its Decline)
- भारत में लोहा गलाने (Iron Smelting) की परंपरा बहुत पुरानी थी।
- कारीगर जंगलों से कोयला और लौह अयस्क लेकर उत्कृष्ट गुणवत्ता का लोहा बनाते थे।
- अंग्रेजों ने 19वीं शताब्दी में इस पर नियंत्रण कर लिया।
- वनों पर रोक और टैक्स प्रणाली के कारण लोहारों का काम ठप पड़ गया।
🏭 फैक्ट्री मालिकों का उदय (Rise of Indian Factory Owners)
- 19वीं शताब्दी के अंत में कुछ भारतीय व्यापारियों ने अपनी मिलें और फैक्टरियाँ स्थापित कीं।
- उदाहरण:
- बॉम्बे (Mumbai) में कपड़ा मिलें
- बंगाल में जूट उद्योग
- टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (1907) — भारत के आधुनिक औद्योगिक युग की शुरुआत
इन उद्योगपतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने की कोशिश की।
📉 अर्थव्यवस्था में बदलाव (Economic Changes in British India)
- भारत अब कच्चे माल का आपूर्तिकर्ता (supplier) और तैयार माल का बाजार (market) बन गया।
- पारंपरिक उद्योग धीरे-धीरे समाप्त हो गए।
- भारतीय किसान और कारीगर ब्रिटिश नीतियों के शिकार बने।
- लेकिन इसने भारत में नए व्यापारिक वर्ग और औद्योगिक सोच को जन्म दिया।
🧠 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions & Answers)
प्रश्न 1: 19वीं शताब्दी में भारत के बुनकरों की स्थिति क्यों बिगड़ी?
👉 क्योंकि ब्रिटेन से मशीनों से बने सस्ते कपड़े भारत में आने लगे और स्थानीय कपड़ा उद्योग नष्ट हो गया।
प्रश्न 2: भारत का प्रमुख लोहा उद्योग कहाँ था?
👉 मध्य भारत और दक्षिण भारत के क्षेत्रों में पारंपरिक लोहार लोहा गलाने का काम करते थे।
प्रश्न 3: टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना कब हुई?
👉 1907 में जमशेदजी टाटा द्वारा।
प्रश्न 4: औद्योगिक क्रांति का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा?
👉 भारत के उद्योगों का पतन हुआ और वह अंग्रेजों के लिए कच्चा माल आपूर्ति करने वाला देश बन गया।
प्रश्न 5: भारतीय उद्योगपतियों की भूमिका क्या थी?
👉 उन्होंने भारत में नई फैक्टरियाँ स्थापित कीं और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा दिया।
अध्याय “उद्योग और अर्थव्यवस्था में बदलाव” हमें यह सिखाता है कि कैसे ब्रिटिश शासन की नीतियों ने भारत के पारंपरिक उद्योगों को नष्ट कर दिया।
लेकिन इसी के साथ भारत में आधुनिक औद्योगिक विकास की नींव भी रखी गई।
यह अध्याय भारत की आर्थिक गुलामी से आत्मनिर्भरता की यात्रा की शुरुआत को दर्शाता है।
[ अध्याय -8 ]
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